Wednesday, 4 January 2017

यूपी-पंजाब सहित पांच राज्यों में बजी रणभेरी, आचार संहिता लागू, 11 मार्च को आएगा चुनाव परिणाम,




 
बलिराम सिंह, नई दिल्ली
चुनाव आयोग ने यूपी, पंजाब समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया है। चुनाव आयोग ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया कि पंजाब, गोवा और उत्तराखंड में एक चरण में, मणिपुर में दो चरण में और यूपी में सात चरणों में विधानसभा चुनाव होंगे। पांचों राज्यों में मतदान चार फरवरी को शुरू होकर आठ मार्च को खत्म होगी और 11 मार्च को चुनाव के नतीजे आ जाएंगे। 
यूपी :
उत्तर प्रदेश में सात चरणों में चुनाव होंगे। पहला चरण में 15 जिलों की 73 सीटों पर 11 फरवरी को वोटिंग होगी। दूसरे चरण में 11 जिलों की 67 सीटों पर 15 फरवरी को वोटिंग होगी। तीसरें चरण में 12 जिलों की 69 सीटों पर 19 फरवरी को वोटिंग होगी। चौथे चरण में 12 जिलों की 53 सीटों पर 23 फरवरी को वोटिंग होगी। पांचवें चरण में 11 जिलों की 52 सीटों पर 27 फरवरी को वोटिंग होगी। छठें चरण में 7 जिलों की 49 सीटों पर 4 मार्च को वोटिंग होगी। सातवें चरण में सात जिलों की 40 सीटों पर 8 मार्च को वोटिंग होगी।
पंजाब:
पंजाब में शनिवार 4 फरवरी को एक ही चरण में चुनाव होगा। पंजाब में विधानसभा की कुल 117 सीटों पर चुनाव होने हैं।
उत्तराखंड:

उत्तराखंड में राज्य की सभी 70 सीटों पर चुनाव 15 फरवरी को कराए जाएंगे। चुनावों का नोटिफिकेशन 20 जनवरी 2017 को जारी होगा। वहीं नॉमिनेशन की आखिरी तारीख 27 जनवरी होगी। 28 तारीख को नामों की छंटाई होगी।
गोवा:
गोवा में विधानसभा की कुल 40 सीटों पर 4 फरवरी को एक ही चरण में चुनाव होगा। गोवा में 11 जनवरी से नॉमिनेशन शुरू होगा और नॉमिनेशन की आखिरी तारीख 18 जनवरी, 2017 है।
मणिपुर:
मणिपुर में 60 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में चुनाव होंगे। पहले चरण की 38 सीटों पर चार मार्च को और दूसरे चरण में 22 सीटों पर 8 मार्च को वोटिंग होगी।
पांच राज्यों में कुल 690 विधानसभा सीटों पर होगा चुनाव-
पांचों राज्यों में कुल 690 विधानसभा सीटों पर चुनाव कराए जाएंगे। इनमें से कुल 133 सीटें सुरक्षित हैं। कुल एक लाख 85 हजार बूथ बनाए गए हैं। कुछ जगहों पर महिलाओं के लिए अलग पोलिंग बूथ होंगे और रंगीन वोटर गाइड सभी परिवारों को पर्ची के साथ दिए जाएँगे। चुनाव आयोग ने उम्मीदवारों के लिए खर्च की सीमा बढ़ा दी है। चुनाव प्रचार में उम्मीदवार यूपी, पंजाब, उत्तराखंड में ज्यादा से ज्यादा 28 लाख रुपए खर्च कर सकते हैं। गोवा और मणिपुर में ज्यादा से ज्यादा 20 लाख खर्च कर सकते हैं।पांचो राज्यों में चुनाव आयोग ने आचार संहिता लागू कर दिया है।

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Wednesday, 16 November 2016

Pollution वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों के मामले में चीन को पीछे छोड़ा भारत



बलिराम सिंह, नई दिल्ली
देश में प्रदूषण से होने वाली मौतों के मामले में भारत ने चीन को पछाड़ दिया है, जो कि अत्यधिक चिंतनीय है। वर्ष 2015 में वायु प्रदूषण की वजह से चीन के अपेक्षा भारत में ज्यादा लोगों की मौतें हुईं। ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजिज प्रोजेक्ट की ताजा रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। वर्ष 2015 में भारत में 3283 लोगों की रोजाना मौत हुई, जबकि इसकी तुलना में चीन में 3233 लोगों की मौत हुई। अध्ययन से खुलासा हुआ है कि 1990 से अब तक लगातार भारत में होने वाले असामयिक मौत की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।
ग्रीनपीस ने इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि इस साल की शुरूआत में ही संस्था ने इस तरह की जानकारी दी थी कि इस शताब्दी में पहली बार भारतीय नागरिकों को चीन के नागरिकों की तुलना में औसत रूप से अधिक कण (पार्टिक्यूलेट मैटर- सूक्ष्म कण) या वायु प्रदूषण का दंश झेलना पड़ रहा है। ग्रीनपीस के कैंपेनर सुनील दहिया का कहना है कि चीन एक उदाहरण है, जहां सरकार द्वारा मजबूत नियम लागू करके लोगों के हित में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सका है। जबकि भारत में साल दर साल लगातार वायु प्रदूषण बढ़ता ही गया है। यह इस बात को भी दर्शाता है कि हमारी हवा कितनी प्रदूषित हो गई है। सरकार को इससे निपटने के लिए तत्काल कदम उठाने ही होंगे।
2005-2011 तक चीन में बढ़ा प्रदूषण-
चीन में पेट्रो ईंधन पर अधिक निर्भरता की वजह से हवा की स्थिति बहुत खराब हो गई थी। 2005 से 2011 के बीच पीएम का स्तर 20 फीसदी तक बढ़ गया था। 2011 में चीन में सबसे ज्यादा बाहरी वायु प्रदूषण रिकाॅर्ड किया गया, लेकिन इसके बाद 2015 आते-आते चीन के वायु प्रदूषण में सुधार होता गया।
भारत में बढ़ती जा रही हैं मौतें-
 लेकिन इस दौरान भारत में वायु प्रदूषण को लेकर ठोस कदम न उठाने की वजह से पिछले कुछ सालों में लगातार प्रदूषण स्तर बढ़ा है। वर्ष 2015 का साल सबसे अधिक वायु प्रदूषित साल रिकॉर्ड किया गया। परिणामस्वरूप भारत में असामायिक मृत्यु की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है।

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Sunday, 6 November 2016

CloudSeeding कृत्रिम बारिश के जरिए होगी दिल्ली प्रदूषण मुक्त



 बलिराम सिंह, नई दिल्ली
दिल्लीवालों को वायु प्रदूषण से राहत दिलाने के लिए कृत्रिम बारिश का सहारा लिया जा सकता है, ताकि बारिश के जरिए वातावरण में व्याप्त जहरीली धुंध जमीन पर बैठ जाए और लोग राहत की सांस ले। रविवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आयोजित दिल्ली कैबिनेट की बैठक में दिल्ली में कृत्रिम बारिश के जरिए प्रदूषण को दूर करने का फैसला किया गया। इस बाबत दिल्ली सरकार केंद्र से सहयोग लेगी। इसके साथ ही एक बार फिर से दिल्ली में ‘ऑड-ईवन फॉर्मूला’ को लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। दिल्ली सरकार ने प्रदूषण काे रोकने के लिए 13 सूत्री आपातकालीन फाॅर्मूला तैयार किया है।
प्रदूषण रोक के लिए दिल्ली सरकार का 13 सूत्री फॉर्मूला-
- अगले पांच दिनों तक किसी भी तरह का निर्माण अथवा भवन गिराने जैसे कार्य को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है।
-अगले पांच दिनों तक डीजल चालित जनरेटर चलाने पर रोक, हालांकि अस्पताल और मोबाइल टॉवर जैसे इमरजेंसी सेवा में इसे लागू नहीं किया जाएगा।
-बदरपुर थर्मल पॉवर प्लांट को अगले 10 दिनों तक बंद किया जाएगा।
-100 फीट चौड़ी सड़कों को स्प्रिंकल तकनीकी से सफाई की जाएगी, पीडब्ल्यूडी द्वारा प्रत्येक सड़क को सप्ताह में एक बार साफ किया जाएगा।
-बदरपुर थर्मल पॉवर प्लांट से राख की ढुलाई भी अगले 10 दिनों तक बंद रहेगा। प्लांट से निकलने वाली राख पर पानी का छिड़काव किया जाएगा, ताकि हवा में राख न उड़े
-पेड़ों से गिरी पत्तियों, कचरे को हर हालत में जलाने से रोकने परजोर। यदि कहीं पर इस तरह की घटना होती है तो इसके लिए संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे।
-10 नवंबर से सड़कों की वैक्यूम क्लीनिंग तरीके से सफाई की जाएगी
-सभी निजी व सरकारी स्कूलों को सोमवार से अगले तीन दिनों तक बंद कर दिया गया है
-एमसीडी यह सुनिश्चित करेगी कि ढलाई घरों पर कचरे न जलाया जाए
ऑड-ईवन की फिर से तैयारी-
प्रदूषण की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए दिल्ली सरकार ने एक बार फिर से ऑड-ईवन फॉर्मूला को लागू करने की तैयारी में जुट गई है। सरकार ने संबंधित एजेंसियों को इस पर काम शुरू करने का निर्देश दिया है।
-सभी स्वास्थ्य और पर्यावरण विभाग को एडवाइजरी लागू करने का निर्देश दिया गया है
-किसी भी स्थान पर कूड़ा-कचरा अथवा पत्तियों के जलाने पर रोक लगाने के लिए पर्यावरण विभाग जल्द ही एक विशेष ऐप लांच करेगा, जिसके जरिए आम जनता सीधे पर्यावरण विभाग को रिपोर्ट करेगी।
-केंद्र सरकार से कृत्रिम बारिश कराने के लिए मुख्य सचिव और पर्यावरण सचिव संपर्क करेंगे।
वर्ष 2003 में महाराष्ट्र में हुई थी कृत्रिम बारिश-     
कृत्रिम बारिश के लिए सिल्वर आयोडाइड या शुष्क बर्फ (ठोस कार्बन डाईऑक्साइड) को जनरेटर या हवाई जहाज के ज़रिए वातावरण में फैलाया जाता है। विमान से सिल्वर आयोडाइड को बादलों के बहाव के साथ फैला दिया जाता है।
सिल्वर आयोडाइड क्रिस्टल की संरचना प्राकृतिक बर्फ के जैसी ही होती है। सिल्वर आयोडाइड क्रिस्टल की सतह पर जमा पानी और बर्फ के कैसे कराते हैं कृत्रिम बारिश प्रवीण कुमार मौसम को अपने अनुरुप परिवर्तित करने के लिए विभिन्न देशों में बादलों के बीजारोपण (क्लाउड-सीडिंग) का इस्तेमाल पिछले 50 से अधिक वर्षो से हो रहा है।
चीन में ओलंपिक खेलों से पहले किया गया-
अगस्त 2008 में बीजिंग ओलंपिक के दौरान इसका प्रयोग किया गया था। कहते हैं कि बादल-बीजारोपण करके ओलंपिक उद्धाटन समारोह पर मंडरा रहे बारिश के खतरे को सफलता पूर्वक टाल दिया गया था। कण इस तरह से बनते हैं, जैसे वे प्राकृतिक बर्फ ही हों।
2003 में महाराष्ट्र में हुई थी कृत्रिम बारिश-
महाराष्ट्र में इससे पहले 2003 में कृत्रिम बारिश कराई गई थी। तब सरकार ने 5 करोड़ 40 लाख रुपये खर्च करके 22 तालुकाओं में कृत्रिम बारिश का प्रयोग किया था। यह प्रयोग सफल रहा था।
प्रदूषण के खिलाफ सड़कों पर आई जनता-
दिल्ली एनसीआर में पिछले एक सप्ताह से छाये प्रदूषण युक्त धुंध के खिलाफ अब दिल्ली की जनता घर से बाहर निकल पड़ी है। रविवार को दिल्ली की महिलाएं, स्कूली बच्चे, सामाजिक कार्यकत्र्ता प्रदूषण के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग को लेकर जंतर-मंतर पहुंचे। लोगों ने प्रदूषण रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की। इस मौके पर लोगों ने हस्ताक्षर अभियान भी चलाया, जिसे जल्द ही राष्ट्रपति को सौपेंगे।

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Thursday, 6 October 2016

पुष्प की अभिलाषा-चाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूंथा जाऊं




बलिराम सिंह, नई दिल्ली
कवि माखनलाल चतुर्वेदी जी की यह कविता भी हमने बचपन में पढ़ी थी, जो कि राष्ट्र भावना को जाग्रत करती है। कविता के माध्यम से एक फूल माली से अपनी इच्छा जाहिर करता है कि उसे किसी देवता के ऊपर चढ़ाने के बजाय देश की रक्षा के लिए जाने वाले सैनिकों की राह में डाला जाए। आजादी के समय लिखी गई यह कविता आज भी हमारे लिए उतना ही प्रासंगिक है, जितना आज से 70 साल पहले थी।
चाह नहीं, मैं सुरबाला के
गहनों में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं प्रेमी-माला में बिंध
प्यारी को ललचाऊँ,
चाह नहीं सम्राटों के शव पर
हे हरि डाला जाऊँ,
चाह नहीं देवों के सिर पर
चढूँ भाग्य पर इठलाऊँ,
मुझे तोड़ लेना बनमाली,
उस पथ पर देना तुम फेंक!
मातृ-भूमि पर शीश- चढ़ाने,
जिस पथ पर जावें वीर अनेक!

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Thursday, 18 August 2016

मोदी सरकार ने स्वतंत्रता सेनानियों की पेंशन में की 5225 रुपए की बढ़ोतरी


बलिराम सिंह, नई दिल्ली
केंद्र की मोदी सरकार ने देश की आजादी के लिए अंग्रेजी हुकूमत से लोहा लेने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के पेंशन में 5225 रुपए की बढ़ोत्तरी की है। अब वर्ष में दो बार केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों पर लागू होने वाली महंगाई भत्ता प्रणाली स्वतंत्रता सेनानियों पर भी लागू होगी। अब तक औद्योगिक कामगारों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित मौजूदा महंगाई राहत प्रणाली वार्षिक आधार पर स्वतंत्रता सेनानी पेंशनधारियों पर लागू होती थी।
अब स्वतंत्रता सैनिक सम्मान पेंशन योजना 1980 के तहत सभी स्वतंत्रता सेनानियों, जीवनसाथियों और मृत स्वतंत्रता सेनानियों के माता-पिता, योग्य पुत्री पेंशनधारियों को लाभ मिलेगा।
देश में है 11690 स्वतंत्रता सेनानी -
अब तक योजना के तहत कुल 171605 स्वतंत्रता सेनानियों और उनके आश्रितों को पेंशन स्वीकृत की गई है। फिलहाल इसके दायरे में 37981 स्वतंत्रता सेनानी और उनके योग्य आश्रित पेंशानधारी आते हैं। इनमें से 11690 खुद स्वतंत्रता सेनानी हैं। इसके अलावा 24792 जीवनसाथी (विधवा अथवा विधुर) और 1499 पुत्री पेंशनधारी हैं।
समय-समय पर शुरू की गई योजनाएं-
वर्ष 1969 में भारत सरकार ने पोर्ट ब्लेयर की सेलुलर जेल में बंद स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान में पूर्व अंडमान राजनीतिक बंदी पेंशन योजना शुरू की थी। वर्ष 1972 में हमारी स्वतंत्रता की 25 वीं वर्षगांठ की स्मृति में स्वतंत्रता सेनानियों की पेंशन के लिए एक नियमित योजना शुरू की गई थी। इसके बाद 1 अगस्त 1980 से प्रभावी होने वाली स्वतंत्रता सैनिक सम्मान पेंशन योजना नामक एक उदार योजना चलाई जा रही है। योजना के तहत स्वतंत्रता सेनानियों के अलावा मृत स्वतंत्रता सेनानियों के जीवनसाथी (विधवा अथवा विधुर), अविवाहित और बेरोजगार पुत्रियों (एक समय में अधिकतम तीन) और माता-पिता पेंशन के लिए योग्य हैं।
नई पेंशन योजना, एक नजर-
पूर्व अंडमान राजनीतिक बंदी पेंशन अथवा जीवनसाथी- 24775 से बढ़ाकर 30 हजार रुपए
ब्रिटिश राज्य से बाहर पीड़ित स्वतंत्रता सेनानी अथवा जीवनसाथी-23085 से बढ़ाकर 28 हजार रुपए
आईएनए सहित अन्य स्वतंत्रता सेनानी अथवा जीवनसाथी-21395 से बढ़ाकर 26 हजार रुपए
आश्रित माता –पिता            - 3380 रुपए से बढ़ाकर 13 हजार से 15 हजार रुपए के बीच
आश्रित पुत्रियां                - 5070 रुपए से बढ़ाकर 13 हजार से 15 हजार रुपए के बीच

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