Thursday, 1 September 2016

महिलाओं के लिए अन्य राज्यों के अपेक्षा सुरक्षित है बिहार


बलिराम सिंह, नई दिल्ली
जनाब, बिहार नहीं बल्कि दिल्ली में है जंगलराज। दिल्ली में रहने वाली महिलाएं सर्वाधिक असुरक्षित हैं। जबकि अनुपात के मुताबिक देश के अन्य राज्यों के अपेक्षा बिहार में महिलाएं कमोबेश सुरक्षित हैं। आंकड़ों के अनुसार बिहार 13वें स्थान पर और अनुपात के अनुसार 24वें स्थान पर है।
नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के मुताबिक वर्ष 2015 में दिल्ली में महिलाओं के साथ 2199 बलात्कार की घटनाएं घटित हुईं। आबादी के अनुपात से यह से 23.7 फीसदी था। जो कि देश में सर्वाधिक था। उधर, देश में सर्वाधिक 4391 बलात्कार की घटनाएं मध्य प्रदेश में हुईं। खास बात यह है कि बिहार संख्या के अनुसार 13वें पायदान पर है और अनुपात के अनुसार 24वें पायदान पर है। केंद्रीय गृहमंत्रालय द्वारा जारी इस रिपोर्ट से स्पष्ट हो जाता है कि बिहार की आलोचना एक सोची-समझी रणनीति के तहत की जा रही है।
भाजपा शासित राज्यों में ज्यादा घटनाएं-
आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, छतीसगढ़ में भाजपा का शासन है। इसके अलावा दिल्ली एक केंद्रशासित प्रदेश है, जहां सीधे तौर पर कानून-व्यवस्था सीधे केंद्र सरकार के हाथ में है।  
गुजरात में भी महिलाएं सुरक्षित-
गुजरात में भी महिलाओं के खिलाफ बलात्कार की घटनाएं काफी कम घटित हुई हैं। केरल को छोड़कर दक्षिण भारत के राज्यों में काफी कम घटनाएं घटित हुई हैं।
लक्षद्वीप में शून्य घटनाएं-
लक्षद्वीप में वर्ष 2015 के दौरान बलात्कार की एक भी घटनाएं नहीं घटी हैं। इसी तरह पुड्‌डुचेरी में मात्र 3 घटनाएं घटित हुईं।
प्रदेश   - रेप की घटनाएं          - फीसदी
1.मध्य प्रदेश- 4391 – 11.9 फीसदी
2. महाराष्ट्र – 4144 – 7.3 फीसदी
3. राजस्थान- 3644 – 10.5 फीसदी
4. उत्तर प्रदेश – 3025 – 3 फीसदी
5. उड़ीसा – 2251 – 10.8 फीसदी
6. असम – 1733 – 11 फीसदी
7. छतीसगढ़ – 1560 – 12.2 फीसदी
8. केरल- 1256 – 6.9 फीसदी
9. पश्चिम बंगाल – 1199 – 2.6 फीसदी
10. तेलांगाना – 1105- 6.1 फीसदी
11. हरियाणा- 1070 – 8.6 फीसदी
12. झारखंड – 1053 – 6.5 फीसदी
13. बिहार – 1041 – 2.1 फीसदी
14. आंध्र प्रदेश- 1027 – 4 फीसदी
15. पंजाब – 886 – 6.7 फीसदी
16. कर्नाटका – 589 – 1.9 फीसदी
17. गुजरात – 503 – 1.7 फीसदी
18. तमिलनाडु- 441 – 1.2 फीसदी
19. जम्मू – कश्मीर- 296 -5 फीसदी
20. उत्तराखंड – 283 – 5.5 फीसदी
21. हिमाचल प्रदेश – 244 – 7.1 फीसदी
22. त्रिपुरा – 213 – 11.5 फीसदी
23. मेघालय – 93 – 6.8 फीसदी
24. गोवा – 86 – 9.4 फीसदी
25. अरुणांचल प्रदेश- 71 – 11.5 फीसदी
26. मिजोरम – 58 – 11.3 फीसदी
27. मणिपुर – 46 – 3.6 फीसदी
28. नागालैंड – 35 – 3.1 फीसदी
29. सिक्किम – 5 – 1.7 फीसदी
केंद्र शासित प्रदेश-
1. दिल्ली – 2199 – 23.7 फीसदी
2. चंडीगढ़ – 72 – 10.1 फीसदी
3. अंडमान निकोबार- 36- 13.5 फीसदी
4. दादरा एंड नगर हवेली- 8- 4.1 फीसदी
5. दमन और दीयू- 5- 4.7 फीसदी
6. पुुडुचेरी – 3 – 0.4 फीसदी
7. लक्षद्वीप – 0 – 0 फीसदी

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Sunday, 8 November 2015

#BIHARELECTION नीतीश फतह-जीत के साथ ही बदल गई लोगों की सोच


-पाकिस्तान, गाय, गद्दार, दलित विरोधी दाव पेंच भी नहीं आए भाजपा के काम
नई दिल्ली, बलिराम सिंह
कहते हैं कि जब बुरे वक्त आते हैं तो अपने भी साथ छोड़ देते हैं, लेकिन धैर्यवान व्यक्ति हमेशा एक सुनियोजित तरीके से आगे बढ़ता रहता है। वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव से लेकर कल तक (7 नवंबर 2015) NITISH KUMAR को चौतरफा हमला झेलना पड़ रहा था। विपक्षी दलों से लेकर नीतीश जी के साथी भी उनकी आलोचना करने लगे थे। इसके अलावा खुद उनके स्वजातीय बंधुओं ने भी निंदा करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। BIHAR के साथ-साथ UP के उनके स्वजातीय बंधु भी अच्छे दिनों की आस में नीतीश कुमार पर खूब हमला किए।
भाजपा से नाता तोड़ने के बाद यदि देश में किसी नेता पर सर्वाधिक व्यक्तिगत हमला किया गया तो वह हैं नीतीश कुमार। भाजपा ने हमले में कोई कसर नहीं छोड़ा। इस हमले में उनके साथ राम विलास पासवान, उपेंद्र कुशवाहा और नए-नए सहयोगी बने जीतन राम मांझी ने भी खूब कटाक्ष किया। याद रहे मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए जीतन राम मांझी के बयान से भाजपा भी खूब तिलमिलाती थी, लेकिन कुर्सी गवांते ही भाजपा ने इन्हें सामने करके दलित वोटों को भुनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। पाकिस्तान, गाय, गद्दार, जंगलराज, जाति जैसे मुद्दों के जरिए धुव्रीकरण की खूब राजनीति की गई।
मीडिया से देश नहीं चलता-
बिहार चुनाव ने साबित कर दिया कि दिल्ली में चैनलों के कार्यालय में बैठकर देश का मूड नहीं समझा जा सकता है। इसके लिए हमें जमीन पर उतरना होगा। देश की नब्ज टटोलनी होगी। इस चुनाव ने मीडिया का भी खोखलापन उजागर कर दिया है। तीन महीने के दौरान एक हिंदी अखबार ने कभी भी नीतीश कुमार की तारीफ नहीं की। रविवार को दिन में साढे़ 10 बजे तक यह अखबार भाजपा को बहुमत दिला रहा था। इसी तरह कुछ चैनल भी बीजेपी के पक्ष में खूब झंडा बुलंद किए हुए थें और मतगणना के दिन 10 बजे तक भी ढोल पीट रहे थें।
हरियाणा में बिहार से ज्यादा जातिवाद-
अमूमन राष्ट्रीय चैनलों में यूपी-बिहार को ही जातिवाद को ज्यादा हवा दी जाती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि जातिवाद का जहर इन राज्यों के बजाय हरियाणा और राजस्थान में ज्यादा है। हरियाणा में ही दलितों को गांव में घुसने नहीं दिया जाता है। लेकिन चैनलों को ये नजर नहीं आता है।

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